मेरी रचनाएँ .

जिंदगी जीना हैं तो किसी भले इंसान का साथ हो ! हैसियत वाले मइयत में भी रूतबा दिखाने आते हैं!!

मेरी रचनाएँ ..

मर जाते घुट घुट के ए शायर जहाँ में ! शायरी इजात करके उम्र बढ़ा दी किसी ने !!

मेरी रचनाएँ ...

दुनिया जिसे चारदीवारी की अबला नार कहती हैं! एक काजल के टिके से वो सारी बला उतार देती हैं!!

मेरी रचनाएँ ....

जन्म,मृत्यु,हानि,लाभ,जस,अपजस जीवन का सांच हैं! मनगढ़ंत तुष्टि से कहीं परे ए कठपुतली का नांच हैं!!

मेरी रचनाएँ .....

चन्द लफ्जों में बयां कर देते हैं लोग चांदनी रातें ! अहमियत उनसे पूछिये जो इसे ओढ़कर सोते हैं !!

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Sunday, 12 June 2022

तुम कहती हो कि तुम्हें

 

Tum Kahati Ho Ki

तुम कहती हो कि तुम्हें 

मुझसे कोई शिकायत नहीं...

सच कहुँ तो मुझे भी तुमसे 

कोई शिकायत नहीं .......

हमारा इश्क अधूरा रहा 

कुछ अनकहा सा किस्सा ...

ना हम कह पाऐ कभी 

तुम भी समझ पाऐ नहीं......

सच कहुँ तो मुझे भी तुमसे 

कोई शिकायत नहीं .......

ख्वाब याद बिखरे रात नींद 

भूल जाना चाहता हूँ...

अहसास पलों का खत्म 

शक मे रिश्ता निभाऐ नहीं......

सच कहुँ तो मुझे भी तुमसे 

कोई शिकायत नहीं .......

💖💖

Sunday, 10 January 2021

चकोर के लिए


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उलझनें हैं हटकर बात कुछ अजब सी हैं !
सांवली हैं सूरत पर खूबसूरत गजब की हैं !!
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लोग समझते हैं चाँद युही रात भर जगमगाता हैं !
वह तो चकोर के लिए अपना इश्क़ निभाता हैं !!
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जद-ऐ-जिंदगी में मन का उम्मीदें टटोलना !
बहुत मुश्किल होता हैं खुद से झूठ बोलना !!
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Wednesday, 29 April 2020

इर्र्फान खान

इर्र्फान खान

"ये शहर हमें जितना देता है, बदले में कहीं ज्‍यादा हम से ले लेता है.''

अपनी जद्दोजहद जिंदगी मे संघर्ष की सफलता से नया आयाम गढने वाले ऐसे कुछ ही गिने चुने होनहार होते हैं,
जो जिंदा हैं तो दुनिया को- ---
संयम आत्मविश्वास से मुस्कुराना,
वक्त के विपरीत सम्भलना ,
खामियों को हुनर बनाना ,
हर बाजी जीतना सीखाते हैं !

विदा होकर भी इस मृत्यु लोक से लोगों के रगो मे सिहर जाते हैं-
उम्मीद की नयी पहचान देकर ,
संघर्षशील जीवन का उदाहरण देकर ,
और फिर से एकबार दोहराकर जाते हैं कि प्रतिभाएँ किसी की मोहताज नहीं होती !

वह अपने जीवन का सफर स्वयं के बलबूते तय करते हैं !

कलाकार कभी नहीं मरते हैं ,उनके किरदार हमेशा जिंदा रहा करते हैं

फलसफा जीवन का यूही चलता रहेगा !
शरीर मरेगा कर्म हमेशा ज़िंदा रहेगा !! 🙏🙏

#इर्र्फान_खान 😔😔

Wednesday, 1 April 2020

वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं

वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं
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वैश्विक महामारी का प्रहार हमे मिलकर आज हराना हैं!
वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं !!

अफवाहें ना फैलाऐ किसी बातों मे नहीं आना हैं!
सरकारी निर्देशों का खुद शख्ती से अपनाना हैं !!

सही सावधानी बचाव हमे अपनों तक पहुचाना हैं!
वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं !!

मास्क,गल्ब्स,सेनेटाइजर जरूरी जरूरत पहनाना हैं!
दिनचर्या अनुशासित कर सबसे दूरी अभी बनाना हैं !!

स्वच्छ स्वास्थ्य रखना हैं घर से बाहर नहीं जाना हैं!
वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं !!

नियमित सादा खान-पान रखे बिमारी नहीं लगाना हैं !
संकेत दिखे रोगी को अस्पताल तुरंत भिजवाना हैं !!

बुद्धि विवेक जगाए रखे नागरिक जागरूक दिखलाना हैं!
वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं !!

जरुरतमंदो के दुःख मे सभी भागीदार बन जाना हैं!
जन जीवन खुशहाल रहे सबको मानवता समझाना हैं !!

मतलब से तो बहुत जिए कुछ रिश्ते निस्वार्थ निभाना हैं!
वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं !!

वेद शास्त्र ऋषी-मुनी का देश हमको नहीं घबराना हैं!
ईश्वर साथ हमारे हैं कर्मों पर विश्वास जताना हैं !!

वसुधैव कुटुंबकम हम जनकल्याण जयकार लगाना हैं!
वक्त बहुत गम्भीर हैं मित्रों विश्व को आज बचाना हैं !!

#COVID19 #STAYATHOME #SAVELIFE #INDIA_LOCKDOWN
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Saturday, 15 February 2020

इस दिल के अब

इस दिल के अब 

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इस 👉💔 दिल के अब 
दो ही हकदार हैं ?

एक मतलबी दुनिया ....
इस्तेमाल होगा बिखर जाएगा 
😒😔

दूसरे तूम हो ....
परवाह होगा फिर सँवर जाऐगा 
😌😌

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बेबाक सारे शहर भर शोर मचाता हैं ,
ख़्वाहिशों मे सँवर क्यों नहीं जाता हैं !
इबादत सा हैं ऐ गुमनाम अपनापन ,
एक तुम्हारे समझ क्यों नहीं आता हैं !!

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ख़ुशनसीब लम्हे खुशियाँ-ऐ-खयाल ,
तुमसा कोइ बहार का शबाब नहीं हैं !
इजहार-ऐ-मोहब्बत खूबसूरत करदे,
तुमसा कोइ बाग का गुलाब नहीं हैं !!

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मेरा यार भी कितना झूठा आँखो से सच छुपाता हैं!
इधर ऊधर की बाते करके अपना दिल बहलाता हैं !!
मालूम हैं हमे उसकी हर आदत मासूमियत रगों की !
वो मुस्कुराकर अधूरे ख्वाबों पर खुशियाँ जताता हैं !!

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दुनिया कहती हैं तो 

कभी परवाह नहीं ....
कभी गुस्सा आ जाता हैं 

एक तुम "पागल" बुलाते हो 
जाने क्यों अच्छा लगता हैं 


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Monday, 3 February 2020

राष्ट्रहित,एकनिति समभाव सर्वसम्मति बनाइए

राष्ट्रहित,एकनिति समभाव सर्वसम्मति बनाइए

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बुद्धि,विवेक,मन लोकलाज तक राखिए,
विचार स्वस्थ स्वच्छ समाज संग बाटिऐ!

धर्म,भेदभाव,ऊच नीच की ऐ अराजकता,
इंसानियत निबाहो इंसान सबको जानिए !!

झूठ,अनैतिक,आदतन बद कही दिखावापन ,
दुःख दर्द अपना जान ऊपकार कर मानिए !

कुंठा,रोग,छल विषाक्त छोड़ व्यवहारिकता,
सादगी दुआ अदब विश्वास प्रेम को बखानिए !!

अलगाव,भ्रम,वहम आक्रोश अनाचार भूलकर,
राष्ट्रहित,एकनिति समभाव सर्वसम्मति बनाइए !

भुखमरी,बेगारी,भ्रष्ट तंत्र के खिलाफत होकर,
एक साथ बुलन्द बोल , कंधे मिलाकर आइए !!

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Sunday, 26 May 2019

खुशियां मर्ज़ी हैं अपने जीने की

खुशियां मर्ज़ी हैं अपने जीने की 
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मुकद्दर में था कुछ छूट गया !
सपना ही तो था जो टूट गया !!

इरादे जो पूरी रात जगाये रखे !
रोशनी का क्या कब बुझ गया !!

कोशिशों को दुआओं से क्या ! 
हारा बुज़दिल वो जो रुक गया !!

खुशियां मर्ज़ी हैं अपने जीने की ! 
फिर क्यों मनाना जो रुठ गया !!

खुदी के जोर पर जूनून हो गर !
एहसान की नजर वो छुप गया !!

तजुर्बे का हैं दुनियां मोहताज !
गुरुर बेआबरू जो झुक गया !!

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देखा अनदेखा भारतीय आडम्बर

देखा अनदेखा भारतीय आडम्बर 
सबकुछ सर्वविदित होते हुए भी लोगों के कुंठा और असंवेदनशील व्यक्तित्व ने मर्यादित जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया हैं!

प्राकृतिक जो इंसान को मिला हैं शारिरीक, मानसिक, व्यवहारिकता मे उसे इतना अपवादित क्यों कर दिया गया!

पढि लिखी तो कुछ ठीक पर गाँव की महिलाओं मे इन सभी बातों पर बहुत अवहेलना होती हैं! वह हर समय अपने को इन्हीं छुट पुट संसकृति संसकार के नाम पर खुद को मनोरोग से पीडित कर लेती है!

माँ अपने बच्चे को स्तनपान कराती हैं तो बच्चे को आँचल से ढक लेती हैं क्यों?

#ताकी स्तनपान करते बच्चे को कीसी की नजर ना लगे !

#बच्चा सहजता से बिना कीसी असमंजस के भूख मिटा पाता हैं!

और एक कारण...

#कुछ एकाध लोगों की रूढ़िवादिता , वाहियात नजरिया हैं ...

घूंघट करो ,यहा मत जाओ, ए मत करो ,ए तुम्हारे लिए नहीं ..

जीवन किसी और का हुकुम पालन कीसी और का
क्यों नहीं घुटन होगा ऐसी जिंदगी से !

माँ के गोद में बच्चा यह भी औरत का श्रृंगार और कुदरत का आशीर्वाद हैं!

खुद के स्वभाव और मातृत्व के लिए हम सभी का मानसिकता प्रेरक होना चाहिए!

रिवाजों ने औरत को दिया परम्परा मर्जाद घर का !
लछमी सा शृंगार दिया क्यों थोपा कलंक डर का !!

🤔🤔

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कलंक होगे मातृभूमि राष्ट्रहित पर

कलंक होगे मातृभूमि राष्ट्रहित पर
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पैरविकार करे जो आतंकवाद पर ,
कैसे मुकाबला कर पाओगे !
भ्रष्टाचार आराजक अर्थव्यवस्था पर ,
सम्भले क्या समझाओगे !!

किसी गरीब किसान के मौत पर 
झूठा अफसोस जताओगे !
भूखे बेघर बच्चे को फूटपाथ पर ,
अखबार ओढकर सोते पाओगे !!
पढे लिखे युवाओं के कौशल पर,
सरे आम मजाक उडवाओगे !
देश की दुर्व्यवस्था अपमान पर ,
जिम्मेदार किसे ठहराओगे !!
बलात्कार उत्पीड़न होगे चौराहो पर,
इज्जत कहा छुपाओगे !
माँ बहन बेटी से क्या सगे रिश्तों पर,
अपना फर्ज निभाओगे !!
प्रजातंत्र लोकतंत्र कभी सर्व समाज पर ,
वफादार नहीं हो पाओगे !
कलंक होगे मातृभूमि राष्ट्रहित पर,
अगर वोट देने नहीं जाओगे !!
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Sunday, 31 March 2019

डमरू की ध्वनि


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दुआ सी कबूल हो जाती ईबादत-ऐ-मन्नतें ,              
किसीको जीने के लिए ख्वाहिशे संवारा होता !
मुकम्मल हजारों होते हैं जिंदगी के काश में,                    
किसीकी आरजू मे खुद को गर हारा होता !!
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ईर्ष्या,स्वार्थ,भय,पीड़ा जी रहे मनो द्धेष में ,
रावण ने हरा था सीता को साधु के भेष में !
छल,कपट,झूट,बे-अदब से सबके कारवां , 
जाने क्या-क्या हो रहा इस राम के देश में !!
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डमरू की ध्वनि से अह्नाद स्वर दिया ,
भय काम मोक्ष तन मन उद्धार किया !
भूतो भस्म से सजे त्रिशूल गंगा विराजे 
लोक सृष्टि शक्ति से ॐ -श्रृंगार किया !!
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