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| राष्ट्रहित,एकनिति समभाव सर्वसम्मति बनाइए |
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बुद्धि,विवेक,मन लोकलाज तक राखिए,
विचार स्वस्थ स्वच्छ समाज संग बाटिऐ!
धर्म,भेदभाव,ऊच नीच की ऐ अराजकता,
इंसानियत निबाहो इंसान सबको जानिए !!
झूठ,अनैतिक,आदतन बद कही दिखावापन ,
दुःख दर्द अपना जान ऊपकार कर मानिए !
कुंठा,रोग,छल विषाक्त छोड़ व्यवहारिकता,
सादगी दुआ अदब विश्वास प्रेम को बखानिए !!
अलगाव,भ्रम,वहम आक्रोश अनाचार भूलकर,
राष्ट्रहित,एकनिति समभाव सर्वसम्मति बनाइए !
भुखमरी,बेगारी,भ्रष्ट तंत्र के खिलाफत होकर,
एक साथ बुलन्द बोल , कंधे मिलाकर आइए !!
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