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Sunday, 26 May 2019

खुशियां मर्ज़ी हैं अपने जीने की

खुशियां मर्ज़ी हैं अपने जीने की 
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मुकद्दर में था कुछ छूट गया !
सपना ही तो था जो टूट गया !!

इरादे जो पूरी रात जगाये रखे !
रोशनी का क्या कब बुझ गया !!

कोशिशों को दुआओं से क्या ! 
हारा बुज़दिल वो जो रुक गया !!

खुशियां मर्ज़ी हैं अपने जीने की ! 
फिर क्यों मनाना जो रुठ गया !!

खुदी के जोर पर जूनून हो गर !
एहसान की नजर वो छुप गया !!

तजुर्बे का हैं दुनियां मोहताज !
गुरुर बेआबरू जो झुक गया !!

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