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| इस दिल के अब |
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इस 👉💔 दिल के अब
दो ही हकदार हैं ?
एक मतलबी दुनिया ....
इस्तेमाल होगा बिखर जाएगा
😒😔
दूसरे तूम हो ....
परवाह होगा फिर सँवर जाऐगा
😌😌
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बेबाक सारे शहर भर शोर मचाता हैं ,
ख़्वाहिशों मे सँवर क्यों नहीं जाता हैं !
इबादत सा हैं ऐ गुमनाम अपनापन ,
एक तुम्हारे समझ क्यों नहीं आता हैं !!
एक तुम्हारे समझ क्यों नहीं आता हैं !!
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ख़ुशनसीब लम्हे खुशियाँ-ऐ-खयाल ,
तुमसा कोइ बहार का शबाब नहीं हैं !
इजहार-ऐ-मोहब्बत खूबसूरत करदे,
तुमसा कोइ बाग का गुलाब नहीं हैं !!
तुमसा कोइ बाग का गुलाब नहीं हैं !!
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मेरा यार भी कितना झूठा आँखो से सच छुपाता हैं!
इधर ऊधर की बाते करके अपना दिल बहलाता हैं !!
मालूम हैं हमे उसकी हर आदत मासूमियत रगों की !
वो मुस्कुराकर अधूरे ख्वाबों पर खुशियाँ जताता हैं !!
इधर ऊधर की बाते करके अपना दिल बहलाता हैं !!
मालूम हैं हमे उसकी हर आदत मासूमियत रगों की !
वो मुस्कुराकर अधूरे ख्वाबों पर खुशियाँ जताता हैं !!
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दुनिया कहती हैं तो
कभी परवाह नहीं ....
कभी गुस्सा आ जाता हैं
एक तुम "पागल" बुलाते हो
जाने क्यों अच्छा लगता हैं
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