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Tuesday, 15 January 2019

समां की मोहब्बत

गुलज़ार

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बेशक वक्त के दायरे मे गुजर जाएगा !
जो बीत गया वो लौटकर नहीं आएगा !!

रश्म-ऐ-कुदरत रोशन होता हैं !
हर सुबह शाम बनकर ढल जाएगा !!

आग का नियति तय होता हैं !
बर्फ धोखे से छुआ तो जल जाएगा !!

मन्नतें मुकम्मल मुलाकात होता है !
कौन जाने कब कहाँ सब बिछड़ जाएगा !!

बहारों से सोलह श्रृंगार होता हैं !
एक पतझड़ से गुलज़ार उजड़ जाएगा !!

बे-खबर बाग-ऐ-खुशबु होता हैं !
समां की मोहब्बत मे बिखर जाएगा !!

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