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| गुलज़ार |
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बेशक वक्त के दायरे मे गुजर जाएगा !
जो बीत गया वो लौटकर नहीं आएगा !!
रश्म-ऐ-कुदरत रोशन होता हैं !
हर सुबह शाम बनकर ढल जाएगा !!
आग का नियति तय होता हैं !
बर्फ धोखे से छुआ तो जल जाएगा !!
मन्नतें मुकम्मल मुलाकात होता है !
कौन जाने कब कहाँ सब बिछड़ जाएगा !!
बहारों से सोलह श्रृंगार होता हैं !
एक पतझड़ से गुलज़ार उजड़ जाएगा !!
बे-खबर बाग-ऐ-खुशबु होता हैं !
समां की मोहब्बत मे बिखर जाएगा !!
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