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Monday, 24 December 2018

मोहब्बत भी ऎसी होती हैं


मोहब्बत भी ऎसी होती हैं 
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सुबह की मध्यम मध्यम धूप ,
जब बदन पर पड़कर 
सहलाती हैं ,
मरहम सी लगती हैं .....

हां महसूस  
मोहब्बत भी ऎसी होती हैं !

गुदगुदी ठण्ड की न पूछो ,
शर्द मौसम का मिज़ाज़ 
अँगड़ाती हैं ,
इतरा सी जाती हैं ......

हां एहसास 
मोहब्बत भी ऎसी होती हैं !

थोड़ी सी मन की गर्माहट ,
हवावों के झोको से राहत 
बहलाती हैं ,
ठहर सी जाती हैं ....

हां रहमते  
मोहब्बत भी ऐसी होती हैं !

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