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| मोहब्बत भी ऎसी होती हैं |
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सुबह की मध्यम मध्यम धूप ,
जब बदन पर पड़कर
सहलाती हैं ,
मरहम सी लगती हैं .....
हां महसूस
मोहब्बत भी ऎसी होती हैं !
गुदगुदी ठण्ड की न पूछो ,
शर्द मौसम का मिज़ाज़
अँगड़ाती हैं ,
इतरा सी जाती हैं ......
हां एहसास
मोहब्बत भी ऎसी होती हैं !
थोड़ी सी मन की गर्माहट ,
हवावों के झोको से राहत
बहलाती हैं ,
ठहर सी जाती हैं ....
हां रहमते
मोहब्बत भी ऐसी होती हैं !
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