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Tuesday, 11 December 2018

आओ उम्मीद थमा दे

 
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शाम हर रोज कुछ ऐसे ही नहीं आता हैं ,
जीवन का बहुत खास तजुर्बा दे जाता हैं !  

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दुसरो से आसरा ,सहनुभूति चाहने वालो,
जरा भय हो मंजिल से मुँह मोड़ने वालो !
दुनिया कदर करती हैं जज्बे-हुनरमंदो की ,
सुनो सबके आगे हालत-ऐ-रोना रोने वालो !!

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Image#03
ताकती रही दुसरो की खिड़कियां ,
कुछ ख़्वाब जगा दे उन आँखों में !
हारे हैं जो तकदीर-ऐ-मजबूरीयों से ,
आओ उम्मीद थमा दे उन हाथों में !!

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