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| आशाओं पर दूजा नया राह |
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कुछ इस तरह ज़माने से अपना दर्द चुरा लेता हूँ !
बारिश की बूंदो में आँखों के आंशू छुपा लेता हूँ !!
पता हैं अब महफ़िल का शौक-ऐ-मिज़ाज़ सारा !
दिन हो रात खुदी के संग तन्हाई में बिता लेता हूँ !!
धोखा ही हैं ऐ चमकती राहे रौनको का भी मज़ा !
अपने ख़्वाबों को उजड़े ख्वाहिशों से सज़ा लेता हूँ !!
नशे में वह असर कहा की सब कुछ भुला दे !
पहले से बेहतर फिर कोई घाव बना लेता हूँ !!
खुदा के दर पर कई बार गया मन्नतो को लेकर !
अब अपनी आशाओं पर दूजा नया राह बना लेता हूँ !!
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