Pages

Monday, 9 April 2018

ऐ समन्दर अखरता क्यों हैं !...

MRImage#01

********
बरसो पुरानी रही सही
क्रोध जलाए हुए ,
बात बात पर अकड़...
रिश्तों पर झुझलाता क्यो हैं !

आंख भरा रहता हैं
दु:ख पीड़ा सहता,
चुप छुपा के मान कोई....
दुनिया से झुठलाता क्यो हैं !!

न जाने कितनो ने नफरतों का 
जहर घोला होगा ,
और लोग पुछते हैं ....
ऐ समन्दर अखरता क्यों हैं !

मन का पाप हैं छुपाया हुआ 
गंगा मैली हो गयी ,
शीतल पावन जल मे....
तन अब जलता क्यो हैं !!

बस्तियां जले औरो के
रौशन घर मेरे हो,
झूठ कपट जरुरी सा
स्वार्थ सबको छलता क्यों हैं !

जिंदगी मिली अफरा तफरी
जुग जुग जीते कुछ ,
तड़पकर बहुत से ....
गरीबी में मरता क्यो हैं !!

********************

#Indian #Politics #Strikes #Humanity #Poverty

0 comments:

Post a Comment