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Saturday, 7 April 2018

ख्वाहिशें .....

MRImage#01
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"कोई मुसलमान तो कहे अपनाओ हिन्दू भेष !
रत्ती भर कुंठा और खाक हो रहा अपना देश !!"

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MRImage#02
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"कही अनकही सुना अनसुना खुदगर्ज हुआ मन ,
मतलबी नीयत अनभला सा चुप नजर हो रखा हैं !
मोल भाव जिदंगी का इस तरह बिका हुआ तन,
चन्द जरुरतों मे कई ख्वाहिशें दर बदर हो रखा हैं!!"

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MRImage#03
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"हाल ए हैं गालिब अब ,
मोहब्बत का भी कारोबार किया जाता हैं !
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दिल खाली हैं आज कल,
बड़े अखबारों में ईश्तिहार दिया जाता हैं !!"

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