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| #Poverty #Politics #India |
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उधार हैं सांसे मानो मजबूर हैं जीने के लिए !
कुड़े से रोटियां ढूंढते भूख मिटाने के लिए !!
समझ होनी यही तकदीर ही है अपनी ऐसी !
दो पल ही सही रजामंदी कुछ खुशी के लिए !!
दोहरा रवइया बड़े सधे चालाकियों से मिले !
कुछ दोस्तो में ऐसे होते हैं दुश्मनी के लिए !!
जरुरी नहीं कि माचिस से आग लगाई जाए !
आपसी रंजिश बहुत हैं घर जलाने के लिए !!
आबाद दुनिया बहुत हो गयी हैं तो भी क्या !
कौन आता हैं रोते को चुप कराने के लिए !!
कह दिया एक बार फिर से भूल जाना हमें !
ऐ तो बाते हैं कि बस दिल बहलाने के लिए !!
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