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Sunday, 7 January 2018

ऐ तो बाते हैं कि बस ....दिल बहलाने के लिए !

#Poverty #Politics #India


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उधार हैं सांसे मानो मजबूर हैं जीने के लिए !
कुड़े से रोटियां ढूंढते भूख मिटाने के लिए !!

समझ होनी यही तकदीर ही है अपनी ऐसी !
दो पल ही सही रजामंदी कुछ खुशी के लिए !!

दोहरा रवइया बड़े सधे चालाकियों से मिले !
कुछ दोस्तो में ऐसे होते हैं दुश्मनी के लिए !!

जरुरी नहीं कि माचिस से आग लगाई जाए !
आपसी रंजिश बहुत हैं घर जलाने के लिए !!

आबाद दुनिया बहुत हो गयी हैं तो भी क्या !
कौन आता हैं रोते को चुप कराने के लिए !!

कह दिया एक बार फिर से भूल जाना हमें !
ऐ तो बाते हैं कि बस दिल बहलाने के लिए !!

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