पुलकित मनरंग ,
शाम गीतो का ,
अाकाश भर रोशनी,
छांव बादल का ,
खुशगवार तेरा मौसम,
हर दिशा हरा भरा ।
फिर मेरे अपने जज्बात
टूटा क्यो हुअा हैं।।
अास पास रहती गुंज,
गुजरतीं मद मस्त हवा,
अन्दाज उमंग परीन्दो सा,
लहलहाते बलखाते ढंग ,
शांत जलधाराए ,
इतना दृश्य तू प्यारा प्यारा।
फिर मेरे नजरो का किनारा,
सूखा क्यो हुअा हैं।।
शर्द शर्द माहोल का तरंग,
दिलकश भरा मिजाज,
हर तमन्ना तू खयाल,
धड़कनो का अास ,
अाचंल जन्नत भर ,
सारा सवांरा खुदा ।
फिर मेरे मन का अागंन ,
सूना क्यो हुअा हैं।।
शाम गीतो का ,
अाकाश भर रोशनी,
छांव बादल का ,
खुशगवार तेरा मौसम,
हर दिशा हरा भरा ।
फिर मेरे अपने जज्बात
टूटा क्यो हुअा हैं।।
अास पास रहती गुंज,
गुजरतीं मद मस्त हवा,
अन्दाज उमंग परीन्दो सा,
लहलहाते बलखाते ढंग ,
शांत जलधाराए ,
इतना दृश्य तू प्यारा प्यारा।
फिर मेरे नजरो का किनारा,
सूखा क्यो हुअा हैं।।
शर्द शर्द माहोल का तरंग,
दिलकश भरा मिजाज,
हर तमन्ना तू खयाल,
धड़कनो का अास ,
अाचंल जन्नत भर ,
सारा सवांरा खुदा ।
फिर मेरे मन का अागंन ,
सूना क्यो हुअा हैं।।
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