अब तो हर सुबह न्युज देखे
तो खास खबर बलात्कार,
किडनैप,डाका,अातंकवाद ,
से तो चाय भी फिकी हो जाती हैं।।
अच्छे थे अो अधेरे जहा मन
वहम से डर जाया करता था ,
अबके दोपहर भी पूरे होश मे कलंकित हैं।
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भला क्या चलचित्रो से ढोग देखकर ,
सदा चरित्र सामर्थ अपने विचारो से उपजाए ।।
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एहसास हर जज्बात मन के
अाइने पर साफ झलकने दीजिए,
एसी भी मोहब्बत क्या ? जो शक के दायरे मे हो ।।








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