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| दौर-ऐ-वक्त |
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अच्छा बुरा जैसे तैसे सब्र के दौर-ऐ-वक्त हैं कि बस बीत जाना हैं !
उसे कौन सी परवाह जीने के लिए रश्म-वो-रिश्ते भी निभाना हैं !!
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| भरपूर इश्क़ |
जरुरी नहीं की खंजर से वार हो और लहू लुहान हो जाए !
किसी से भरपूर इश्क़ भी होकर मन पूरा बेजान हो जाए !!
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| एक कोशिश जरुरी हैं |
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बहुत से लोग बड़े काम के चक्कर में छोटे रह जाते हैं !
कुछ एक छोटे छोटे प्रयासों से बहुत बड़े बन जाते हैं !!
**एक कोशिश जरुरी हैं छोटा सा ही सही **
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