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Thursday, 25 January 2018

माँ बनकर छाती से गंगा छलका देती है ....

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आज के युवाओं में कितना जूनून और एकता है ये देखते ही बन रहा है ,यही नहीं इनमे कितना जागरूकता है यह भी जानकार बड़ी खुशी हो रही है! जिस तरह से एक महिला के मान,सम्मान की लड़ाई लड़ी जा रही है वर्तमान में युवाओं सेना विशेष द्वारा! लोग इतना अच्छा समझते है एक महिला के अधिकार और इज्जत को! हमारे पूरखों के दिए संस्कार ,सभ्यता और पौराणिक परम्परा का कितना मान करते है! हट्टे-कट्टे तंदरुस्त पढ़े लिखे आधुनिक युग के युवा है ,ऐसा ही इनसे सबको उम्मीद भी था और आगे भी रहेगा!
लेकिन किन्तु परन्तु .....एक बात यह भी है इन्ही युवाओं सेना विशेष से ....यह लड़ाई सिर्फ इतिहास के पन्नों तक ही क्यों सिमित हो और रहे ,क्यों रानी पद्मावती के जौहर ,राजघराना या एक विशेष समुदाय की ही लड़ाई बनकर रह जाए !

    भारत में हज़ारो पद्मावती आज के दौर में इतने सभ्य ,मजबूत और योग्य युवाओ के रहते ...........
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#क्यों जन्म लेने से पहले दम तोड़ देती है ?
#क्यों बलात्कार की शिकार हो जाती है ?
#क्यों बेसिक शिक्षा से भी अनपढ़ रह जा रही है ?
#क्यों मानसिक अत्याचार सहती है ?
#क्यों दहेज़ उत्पीड़न में जौहर हो जा रही है ?

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इधर उधर करके हर बात को टाल जाना क्या अच्छा है ...नहीं बिलकुल नहीं ..
जिक्र कुछ इनका भी होना चाहिए यह किससे और इसमें शामिल कौन रहता है ....

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 #रास्ते ,गलियों में छेककर फब्तियां कसना,
 #स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं पर अंकुश लगाना,
#अकेले कही आना-जाना सुरक्षित नहीं ,
 #तमाम रीती,रिवाज़ मर्यादाओ को थोपकर अपूर्णता मढ़ना ,
 #पुरुष प्रधानता में घरेलु हिंसा ,

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करिये कुछ इसपर भी विचार ! इन्ही लोगो में मानिये या ना कई लोग होंगे जिन्होंने ऐसे कृत्य जरूर किये होंगे हमें थोड़ी ना पता है ! सिर्फ अपने राजघराने या परिवार की बेटी ही बेटी नहीं.... बेटियाँ सबके घर की उतने ही मान,सम्मान ,इज्जत की अधिकारी होती है ! यही नजरिया,नीयत हर घर की पद्मावती(महिलाओं) के लिए होना चाहिए ! तब नहीं तो अब कसम लेना चाहिए की नहीं करेंगे ऐसा कभी और हमेशा इसी तरह सभी महिलाओ की लड़ाई लड़ेंगे !
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क्या हो जाता है जब बात इस तरह का किया जाता है इन्ही युवाओ को ,इनके बाजूओं की ताकत और जबान को ,इनका इतिहास ,गौरव ,परिवारिक परम्परा के अनुसार ! लड़ाई लड़नी ही है तो सत्यता पर आधारित होनी चाहिए जिसका समाज के इतिहास ,वर्तमान और भविष्य सबपर परिणाम उत्तम प्रभावपूर्ण हो !


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ताकत बुद्धि रूढ़िवादी परम्परा में तन से जरूर कमजोर समझी जाती है ,
बहुत पौरुष ,आत्मबल बढ़ जाता है जब कंधे पर भरोषा अपना हाथ रख देती है !
समाज के तमाम रूढ़िवादी रिवाज़ो से प्रताड़ित अनपढ़ हो या पढ़ी लिखी ,
हर दुःख-दर्द बटाती कैसा भी भूल हो अपनी दयालुता से सबकुछ भुला देती है !!
कभी भी जबरदस्ती कोई स्त्री कुछ भी मन से राजी होकर तो नहीं करती ,
ज़रा सा इज्जत मिलने पर आँखों से लेकर व्यवहार तक करुणा भाव बरसा देती है ! 
मन प्रकृति दुनिया की ऐसी कुदरत की देन ह्रदय से इतना कोमल होती है ,
बहन,बीबी,बेटी घर आँगन की प्रेम सही माँ बनकर छाती से गंगा छलका देती है !!
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