दौर कुछ एैसे होगे,~~~~~।।
फिर सवाल क्यु ,मायुस नजर क्यु ।
मालुम न रहा, दौर कुछ एैसे होगे ।।
मालुम न रहा, दौर कुछ एैसे होगे ।।
सूनी सी रहेगी ,बगैर वक्त चर्चे के ।
बेखबर क्यु चहकते शहर एैसे होगे।।
बेखबर क्यु चहकते शहर एैसे होगे।।
दौर कुछ एैसे होगे,~~~~~।।
दरार पनपते ,रुसवाइया बेहद ।
ठुकराये बिखरे ,रश्मो ए रिश्ते ।।
ठुकराये बिखरे ,रश्मो ए रिश्ते ।।
इल्जाम खुद का, गुनहगार अपना ।
बेसब्र दिल के अब, चोट एैसे होगे ।।
बेसब्र दिल के अब, चोट एैसे होगे ।।
दौर कुछ एैसे होगे,~~~~~।।
झुठे बनावे , शिकवे बहाने ।
बदनाम गैरत ,सब धूल धूल ।।
बदनाम गैरत ,सब धूल धूल ।।
सीखे बहुत ,रास्ते पे नसीहत ।
पग-पग कदमो के, मोड़ एैसे होगे ।।
पग-पग कदमो के, मोड़ एैसे होगे ।।
दौर कुछ एैसे होगे,~~~~~।।
रश्म ये सौ ,निबाहे समझ भर ।
हर अदब नीयत,नजाकत कर ।।
हर अदब नीयत,नजाकत कर ।।
अजब हाल हैं,कदर मानते क्या ।.¥
गुंजते खलिश के ,शोर एैसे होगे ।।
गुंजते खलिश के ,शोर एैसे होगे ।।
दौर कुछ एैसे होगे,~~~~~।।








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