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| #Love_Effects |
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ना कोई खता ना ईल्जाम
फिर क्यो सजा मुक्म्मल हुआ हैं !
कोई तो आए हमे बचा ले..
इस ईश्क की सुनामी में...
अब-तक सारा शहर डूब चुका हैं !!
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#हम पगलाए हुए क्यों बेवजह,
चर्चा-ए-शहर तकदीर हैं !
जामाने को क्या पता उसके राज,
जो शराफत की तश्वीर हैं !!
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#जज्बात ही हैं कुछ पलो का ,
सारे राहत-ए-रात जगाता !
जहां में ईश्क ना होता अगर
दिल के रिश्ते कौन निभाता !!
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#हर बार मुकर कर खुदी को,
मासुम से उबर जाते हैं !
उन गहरी झील सी आंखों में,
हम डूबकर मर जाते हैं !!
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#कोशिश-ए-इजहार बहुत किए,
पर ईश्क जताना नहीं आया !
उसके नक्श-ए-नजरों के आगे ,
सुकून में हर बात भुला आया !!
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#ईश्क का एहसास-ए-आलम ,
मजा कितना क्या बताऊ !
मन ही मन युं मुस्कुराता हूँ ,
जी करता पागल हो जाऊ !!
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