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कम पढ़े लिखे का दौर जैसा तैसा रहा होगा कभी, पर पढ़े लिखे आज का समय बहुतायत बुद्धिजीवी लोगों से कुछ अच्छे की उम्मीद बदलाव की आसा हैं और होना भी चाहिए ! भविष्य के मुर्खता वाले बेढंग बर्ताव से पुरुषों का माहौल दुभर हुआ हैं तो फिर रिवाजों में कैद महिलाओं की बात क्या हम करें और वो भी भारत में जहां तरह-तरह के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , महिला सशक्तिकरण जैसे इस जुग मे योजनाऐ ,अभियान चलाई जाने की अभी भी नौबत बनी पड़ी हैं!
ऐसे ही दुनियादारी में मिसाल बनकर उभरी एक महिला के बारे कुछ आज जानना चाहेगे जो वर्तमान भारत का गौरव बन चुकि हैं! जिनके बारे में कुछ बताने की कोशिश कर रहा हूँ ! ऐसे ही लोगो का प्रयास हममे हिम्मत और जीने की नयी उम्मीद जगाता है !
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आज से दस साल पहले ऐलोपेशिया (Alopecia) नामक शारीरिक कमी (Disorder) से पीड़ित हो गयी थी! यह कोई छुआ छुत या बिमारी नहीं हैं और इससे कोई और खतरा भी नहीं ,ना कैंसर का कोई भाग है!ऐलोपेशिया की वजह से शरीर के सारे बाल खतम हो जाते हैं और ऐसा ही इनके साथ हुआ ! इसी कमी की वजह सब इनके सर के बाल ख़तम हो गये,फिर अब क्या बताना यह एक औरत के लिए अभिषाप ही हुआ दम घुट जाता हैं छोटी सी बात को लेकर लोगों के सामने आने में ! भारत में ही नहीं पूरे विश्व में बहुत भद्दा या लोगों के मजाक का कारण हो जाता हैं ऐसी स्थिति ,व्यक्ति का घर से बाहर आना जाना मुस्किल हो जाता है बहुत से लोग अपमान का कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते!हम भलीभात समाज के इस तरह के दुर्व्यवहार से परिचित है और हम समझ सकते हैं उस व्यक्ति को कैसा महसूस होता होगा जो लोगो के छिछोरेपन का सामना करता है!अक्सर लोगों को सिर्फ औरों की सफलता ही दिखती है पर उसको पाने में समाज के किन किन स्वीकारिता से जूझना पड़ता है,शायद वही समझ सकता है जिसने हासिल किया है,और लोग तो बस हर बात किस्मत पर तोह देके छोड़ देते है!
इसी पीड़ा और समाजिक नजरिया कुरितियों के चलतबे इन्होंने भी एक दफा खुदखुशी तक की नौबत बना लिया था ! पर शायद वक्त को कुछ और मंजूर था! खूद में एक आत्मविश्वास, उम्मीद जगाया और मरने से ज्यादा जीने की चाहत मन में ठान लिया! समाज के हर अंधकार,प्रताड़ना, रुढ़ीवादी नजरिये का मुस्कुरा कर प्रतिकार करके आगे बढ़ने की हिम्मत जुटा लिया !
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अपने जज्बें हौसलें से इन्होनें खुद अपना दिन बदल लिया और अपने इसी आत्मविश्वास ,हिम्मत,धैर्य से आज उसी समाज के आगे सर उठा कर जीती हैं जो कभी नजर मिलाने तक की नौबत न आने देता था! समाज के अंधपरम्परा क्षुब्ध बुद्धि वालो को अपने गुण,बौद्धिकता से समय पर मुहतोड़ जवाब दिया हैं! आज हम उसी समाज के लोग उनके जीवन का एक हिस्सा बनने की चाहत रखते हैं ! इन्होंने अपने मजबूत इरादो के प्रयास से लोगों के नजरिये से खुद को नहीं बल्कि लोगों का नजरिया बदल दिया ! खूबसूरती का समाज ने जो पैमाना बनाए रखा था वो आज गलत साबित हुआ हैं!
इनका नाम केतकी जानी हैं और गुजरात अहमदाबाद से सम्बंधित हैं ! तश्वीरों में आप इनके मनोबल,हुनर और खूबसूरती को देख सकते हैं!मै और इनके बारे में क्या बताऊं,क्या परिचय दे सकता हूँ, जिनकी प्रतिभा अब किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं!
कुछ जानकारियां ऐलोपेशिया (Alopecia) के बारे में
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