कोई जरुरी नहीं की सारी लड़ाई सीमा पर जाकर ही लड़ी जा सकती है ,कुछ आम जनता के भी दाईत्व होते है उन्हें भी अगर हम ईमानदारी से निभाते है तो यह भी देश के गौरव में एक बहुत बड़ा योगदान ही होगा ! अपनी लोकलाज,परम्परा,संस्कृतिअपनाकर! भ्रस्टाचार,अराजकता ,राजनीति, आदि ना करेंगे ना होने देंगे ! महिलाये कई उत्पीड़न में मारी जा रही है ! पुरुष राजनीति ,धर्म और जात-पात की लड़ाई में मारे जा रहे है ! ये कैसा आज का भारत देश है ! अफ़सोस होता है कई बार यह सब देख सुनकर ,क्या हो गया है लोगो को ,आज का कैसा माहौल बना दिया गया है ! मेरी कुछ एक दृश्य पर पंक्तियां ....
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**बहुत बदल गया अपना देश**
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तबसे अब में खूब,मचा विकास का जनादेश !
एसी तैसी हुआ ,बहुत बदल गया अपना देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
अंग्रेजी का भाव बढ़ गया ,देश हुआ परदेश !
पगड़ी गमछा लाज लगे,भाए बिलायती भेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
दाल भात पचता नहीं,रोग बर्गर पिज्जा की तैस !
शौखिनी में बड़ी गरीबी,भुगते लाग बाज की रेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
माँ बहन अफसोस हो गयी,बिटिया हुई कलेस!
कलंकओढ़ बहू जल गयी,कलमु ही है सन्देश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
गवांर मरे मजदूरी बिन ,पढे़-लिखे सब शेष !
करता धरता आलस बांचे,बचा न कुछ उद्देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
तनख्वाह से ना चले घर,महंगाई में घटता क़ैस !
व्हाट्सअप ट्विटर पढ़े पढ़ाई,२४ घंटे बुक फेस !!
साधू सन्त व्यापार करे ,चोर उचक्का आदेश !
हुआ निकम्मा अभिेनेता ,जग बांटे सब उपदेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
शाकाहारी खेत खरीहान ,उजाड़ बसे सब ऐस!
मांसाहारी भूख जीभ का, शमशान बना ए द्वेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
चारा सारा राजनीति खा गया,गाये खाए आवेश !
किसान मरे बिन पानी के,न लगा किसीको ठेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
पत्थर खुद पर दे मारे ,कुछ उन्मादी तर्क अन्वेष !
आम बात हुई सहादत ,क्या सरकारी अध्यादेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
बहुत बदल गया अपना देश !
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तबसे अब में खूब,मचा विकास का जनादेश !
एसी तैसी हुआ ,बहुत बदल गया अपना देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
अंग्रेजी का भाव बढ़ गया ,देश हुआ परदेश !
पगड़ी गमछा लाज लगे,भाए बिलायती भेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
दाल भात पचता नहीं,रोग बर्गर पिज्जा की तैस !
शौखिनी में बड़ी गरीबी,भुगते लाग बाज की रेस !!
माँ बहन अफसोस हो गयी,बिटिया हुई कलेस!
कलंकओढ़ बहू जल गयी,कलमु ही है सन्देश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
गवांर मरे मजदूरी बिन ,पढे़-लिखे सब शेष !
करता धरता आलस बांचे,बचा न कुछ उद्देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
तनख्वाह से ना चले घर,महंगाई में घटता क़ैस !
व्हाट्सअप ट्विटर पढ़े पढ़ाई,२४ घंटे बुक फेस !!
साधू सन्त व्यापार करे ,चोर उचक्का आदेश !
हुआ निकम्मा अभिेनेता ,जग बांटे सब उपदेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
शाकाहारी खेत खरीहान ,उजाड़ बसे सब ऐस!
मांसाहारी भूख जीभ का, शमशान बना ए द्वेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
चारा सारा राजनीति खा गया,गाये खाए आवेश !
किसान मरे बिन पानी के,न लगा किसीको ठेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
पत्थर खुद पर दे मारे ,कुछ उन्मादी तर्क अन्वेष !
आम बात हुई सहादत ,क्या सरकारी अध्यादेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
बहुत बदल गया अपना देश !
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