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Saturday, 9 December 2017

ऐ कैसी कमी कैसा एहसास....

ऐ कैसी कमी कैसा एहसास

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क्या दिल की लगी हवा ने दरवाजा खटखटाया हैं !

हमे लगा की सब कुछ भुलाकर वो लौट आया हैं !!



हिसाब लेकर दिनभर का इत्मिनान खोए हुए थे ! 

जिंदगी का फिर से जगती वह हंसी रात लाया हैं !!



ढलते वक्त शाम की थकाई सूनसान सी रगे थी !

एकाएक सारा तन मन रोम रोम खुशी समाया हैं !!



छिटका के अधूरे ख्वाहिशे उघते करवट आंखे थी! 

कोई युं सुहाना सा सपना लिए खूब नींद आया हैं !!



सुकून के फेर में कुछ रुचियों से रुबरु होना था !

दुखा के पल सिहर दिल आज फिर रो आया हैं!!



खैर क्या हुआ जो हवा का हमसे मजाक हो गया !

उसकी याद ने इसी तरह कई बार मुझे सताया हैं !!



कभी जो महसूस होगी उसे भी ऐसी हमारी कमी!

खुद ब खुद चली आएगी ज्यो बीता रुह आया हैं !!


****** किस्मत*******

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