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Monday, 6 November 2017

याद और यादों की बात.....

याद और यादों की बात
 
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बीती यादों में युं शाम का मिजाज बदलता हैं !
महसूस जाने क्या वो उदासिया सा ढलता हैं !!

बार बार चित्राधार पर पुरानी तश्वीरे झांकना !
धुंध सा रह सह मध्यम आंधिया सा उड़ता हैं !!

मौसम के रुझान बस बिखरे परिन्दो के बसेरे !
तिनकों का बना दिल आशियां सा बसता हैं !!

छिटकारे बूंदो के दे मारे हो आधी निंदो को !
जागती आंखों में मानो ख्वाबो सा पलता हैं !!

उन पहलुओं की जिद फिर मन को चिढ़ाता !
रह गयी जो बात वो खामियां सा खलता हैं !!

जब याद आता लौट आता काश बीते दिन !
आधा पौना कम जदा खुशियां सा लगता हैं !!

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