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Saturday, 14 October 2017

यतीम (Orphans)...

 
Orphans life

दर न छप्पर आंगन कहां,
दरवाजा न कोई पता,
नाम क्या हो पहचान ढुढता ,
कतरों में दिन गीन लिया !!
अक्षर न ही जुबां समझता ,
हर बात पर मुस्कुराता !
जगती आस में करवटें बदल,
गम सुकुन जीत लिया !!
कभी मायूस न कुछ खोने ,
न पाने का ख्वाहिश !
जीवन के हर तौर तरीकों से ,
समझौता सीख लिया !!
जीता हैं खुद को भल ,
न दुनिया की नुमाइश !
बचपन से ही गरीबी ने ,
सारे खाब छीन लिया !!
शिकवा न किस्मत ,
न दुवाओ का सहारा !
वक्त की जबरदस्ती ने,
बदहाल तमाशबीन किया !!
आसरा न उम्मीद किसीका ,
वह जिंदगी से नही हारा !
इबादत खुदा का शुक्र करता,
जाने क्यो उसे यतीम किया !!
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