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| भला कैसे हो इस देश के किसानों जवानों का |
भला कैसे हो इस देश के किसानों जवानों का जब राजनीति दोगलेपन की हो गयी हो । समस्या समस्या सिर्फ समस्या फिर समाधान कौन करेगा ।
भारत कृषि प्रधान देश हैं, भारत गांव में बसता हैं।बस मन को भरमाने वाला बात और कुछ नहीं।
देश के विकास और उपलब्धियों का आयी गयी सरकारों ने सिर्फ़ ढोंग ढिढोरा पीटा कुछ नहीं किया । हा बड़े बुजुर्गो से ए जानने को मिला ,जय जवान जय किसान कहने वाला बहुत कुछ किया था। वक्त रहते अगर सारे व्यवस्था किये गये होते ए नौबत ही न आती। ए सारे आंकड़े राजनीति करने मतलब निकालने के लिए, बरकाने बहाने बाजी हैं और कुछ नहीं,आरोप पर आरोप । किसानों की समस्याओं पर विधवा विलाप कर रहे लोगों से ए भी तो पुछना चाहिए उनके वक्त कितने नहर जैसे पानी खाद की व्यवस्था हो पाइ। बेहतर सिचाई के लिए खाद-पानी जरुरी हैं ए बात तो पता ही होगा उनको ,फिर कही नहर हैं तो समय पर पानी नहीं,कही तो नहर ही। चपड़गंजू चापलूसों की कमी नहीं यहाँ सब अन्दर करामात हो जाता हैं।पीने के पानी का भी ए इन्तजाम न कर पाए कितने जगह । मर गये बड़े बूढ़े देखते देखते मेरे गांव मे सालो साल की उम्र से सुनते सुनते अब 20 साल के अंतराल पर थोड़ी नहर की सफाई,पानी का टंकी तो लग गया पर पानी का पता नहीं। सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं अन्य राज्यों मे इससे भी खराब हालात हैं ,कुछ भी इस पर वर्तमान सरकार को गम्भीरता से विचार करना चाहिए,सुधार होना चाहिए ।बहुत अफसोसजनक इस तरह नाउम्मीद होकर खुदकुशी जैसी घटनाएं बहुत ही दयनीय ,असहाय अत्यन्त दुखद हैं ए सब । भगवान इनके परिवार को बल दे सहनशक्ति दे,प्रार्थना हैं ।वर्ना भारत ने राजनीति का मतलब ही बदल डाला हैं । राजनीति-राजनीतिक दल को पड़ोसी आतंकवाद से भी निर्दयी मानता हूँ मैं, बिलकुल बेशर्म । बाहर से पड़ोसी दुश्मन जवान मार रहे है ,अन्दर राजनीति ढकोसला भारत की अन्तरआत्मा का कत्ल कर रहा हैं ।धन्य हैं इस देश के लोग फिर भी अपना भारत महान हैं।
भारत कृषि प्रधान देश हैं, भारत गांव में बसता हैं।बस मन को भरमाने वाला बात और कुछ नहीं।
देश के विकास और उपलब्धियों का आयी गयी सरकारों ने सिर्फ़ ढोंग ढिढोरा पीटा कुछ नहीं किया । हा बड़े बुजुर्गो से ए जानने को मिला ,जय जवान जय किसान कहने वाला बहुत कुछ किया था। वक्त रहते अगर सारे व्यवस्था किये गये होते ए नौबत ही न आती। ए सारे आंकड़े राजनीति करने मतलब निकालने के लिए, बरकाने बहाने बाजी हैं और कुछ नहीं,आरोप पर आरोप । किसानों की समस्याओं पर विधवा विलाप कर रहे लोगों से ए भी तो पुछना चाहिए उनके वक्त कितने नहर जैसे पानी खाद की व्यवस्था हो पाइ। बेहतर सिचाई के लिए खाद-पानी जरुरी हैं ए बात तो पता ही होगा उनको ,फिर कही नहर हैं तो समय पर पानी नहीं,कही तो नहर ही। चपड़गंजू चापलूसों की कमी नहीं यहाँ सब अन्दर करामात हो जाता हैं।पीने के पानी का भी ए इन्तजाम न कर पाए कितने जगह । मर गये बड़े बूढ़े देखते देखते मेरे गांव मे सालो साल की उम्र से सुनते सुनते अब 20 साल के अंतराल पर थोड़ी नहर की सफाई,पानी का टंकी तो लग गया पर पानी का पता नहीं। सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं अन्य राज्यों मे इससे भी खराब हालात हैं ,कुछ भी इस पर वर्तमान सरकार को गम्भीरता से विचार करना चाहिए,सुधार होना चाहिए ।बहुत अफसोसजनक इस तरह नाउम्मीद होकर खुदकुशी जैसी घटनाएं बहुत ही दयनीय ,असहाय अत्यन्त दुखद हैं ए सब । भगवान इनके परिवार को बल दे सहनशक्ति दे,प्रार्थना हैं ।वर्ना भारत ने राजनीति का मतलब ही बदल डाला हैं । राजनीति-राजनीतिक दल को पड़ोसी आतंकवाद से भी निर्दयी मानता हूँ मैं, बिलकुल बेशर्म । बाहर से पड़ोसी दुश्मन जवान मार रहे है ,अन्दर राजनीति ढकोसला भारत की अन्तरआत्मा का कत्ल कर रहा हैं ।धन्य हैं इस देश के लोग फिर भी अपना भारत महान हैं।








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