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Monday, 26 January 2015

तुमसे मोहब्बत कर के ।


तुमसे मोहब्बत कर के ।


तुमसे मोहब्बत कर के ।!

निगाहें झलका रहीं,
पलको पे नज्म कोइ ।
स्याही ए लिखावट ,
हैं दिल्लगी मेरी।
संवरते शब्द बहुत खुब,
सोहरत अौर नजाकत की।
सख्शियत अौर करीब वालो मे,
हम भी अजीज हो गए ।।
तुमसे मोहब्बत कर के ।। १।।

नवाजा खुदा ने नख्श ए नूर ,
यकिनन हैं जिदंगी मेरी ।
महफिले अावाम अदब ,
सुरत अौर सीरत की।
दुनिया के अौर नसीब वाले मे,
हम भी अमीर हो गए ।
तुमसे मोहब्बत कर के ।।२।।

                              ❆❆❆❆❆

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