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| Orphans Food |
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ऐ मेरे खुदा मेरा रोम रोम तेरे कुदरत पे निशार है !
तेरी बनाई इस जन्नत जहां कृति से मुझे प्यार है !!
परवरदिगार शिकायत है तुझसे या मेरी दुआ कबूल कर !
अब कितने आँखों के आंसू सूख गए इस बात पे अमल कर !!
क्या गुनाह है उनका क्या भूल की उन्होंने जो इस कदर है !
रोजमर्रा की जिंदगी में घुला न जाने कौन सा जहर है !!
क्यों दी जीने को ज़िन्दगी जो दो वक़्त की भूख न मिटा सका !
वो जीता है दुसरो का जूठन खा के नहीं जानता तेरी वफ़ा !!
या रब मिटा भूक की बीमारी बंद कर दौलत की मारामारी !
बनाया है जहां तो ख्याल रख दे इनको भी खुशियां सारी !!
************तेरी बनाई इस जन्नत जहां कृति से मुझे प्यार है !!
परवरदिगार शिकायत है तुझसे या मेरी दुआ कबूल कर !
अब कितने आँखों के आंसू सूख गए इस बात पे अमल कर !!
क्या गुनाह है उनका क्या भूल की उन्होंने जो इस कदर है !
रोजमर्रा की जिंदगी में घुला न जाने कौन सा जहर है !!
क्यों दी जीने को ज़िन्दगी जो दो वक़्त की भूख न मिटा सका !
वो जीता है दुसरो का जूठन खा के नहीं जानता तेरी वफ़ा !!
या रब मिटा भूक की बीमारी बंद कर दौलत की मारामारी !
बनाया है जहां तो ख्याल रख दे इनको भी खुशियां सारी !!








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