Pages

Wednesday, 30 March 2011

ऐ मेरे खुदा .....

Orphans Food
 ********
ऐ मेरे खुदा मेरा रोम रोम तेरे कुदरत पे निशार  है  !

तेरी बनाई इस जन्नत जहां कृति से मुझे प्यार  है  !!

परवरदिगार शिकायत है तुझसे या मेरी दुआ कबूल कर  !

अब कितने आँखों के आंसू सूख गए इस बात पे अमल कर  !!

 क्या गुनाह है उनका क्या भूल की उन्होंने जो इस कदर  है  !

रोजमर्रा की  जिंदगी में घुला न जाने कौन सा जहर  है  !!

 क्यों दी जीने को ज़िन्दगी जो दो वक़्त की भूख
मिटा सका  !

 वो जीता है दुसरो का जूठन खा के नहीं जानता तेरी  वफ़ा  !!

या रब मिटा भूक की बीमारी बंद कर  दौलत की मारामारी  !

बनाया है जहां तो ख्याल रख  दे  इनको भी खुशियां सारी  !! 
                                                    ************

0 comments:

Post a Comment